अब Koboshi में आप हिंदी, उर्दू और बांग्ला के जवाब अंग्रेज़ी अक्षरों में दे सकते हैं। क्विज़ में हिंदी, उर्दू या बांग्ला का कोई शब्द रोमन अक्षरों में टाइप कीजिए, जैसे हम में से कई लोग मैसेज लिखते हैं। वह जवाब भी सही माना जाएगा। आप जो भी हिंदी, उर्दू या बांग्ला शब्द सेव करते हैं, उसके साथ उसकी रोमन स्पेलिंग भी सेव रहती है।
हिंदी, उर्दू और बांग्ला बोलने और सीखने वालों को अंग्रेज़ी अक्षरों की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
हम जानते हैं कि शायद आप अपनी भाषा की लिपि में लिख सकते हैं, लेकिन ख़ासकर डिजिटल डिवाइस पर लिखने का झंझट नहीं लेना चाहते।
उर्दू की बात करें तो 2025 का एक पेपर रोमन उर्दू को “the dominant form of informal communication on platforms like Instagram, WhatsApp, and social media” (इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर रोज़मर्रा की बातचीत का सबसे प्रचलित रूप) बताता है। पेपर इसकी लोकप्रियता की वजह “the lack of easy-to-use Urdu keyboards and familiarity with Latin characters” (इस्तेमाल में आसान उर्दू कीबोर्ड की कमी और लैटिन अक्षरों से परिचित होना) बताता है (Butt, Varanasi and Neumann, RANLP 2025)। हिंदी की बात करें तो 2014 की एक स्टडी में अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान, नरेंद्र मोदी और बीबीसी हिंदी के पब्लिक फ़ेसबुक पेजों से अक्टूबर 2013 में लिए गए 1,062 हिंदी-अंग्रेज़ी कमेंट देखे गए; इनमें से 93.17% रोमन लिपि में और 2.93% देवनागरी में लिखे गए थे (Vyas et al., EMNLP 2014)।
यह स्टडी पुरानी है, लेकिन रुझान आज भी लगभग वैसा ही होगा।
इसलिए हिंदी, उर्दू और बांग्ला सीखना इन्हें बोलने वालों के लिए सहज होना चाहिए, ख़ासकर उन लोगों के लिए जो अपने परिवार की भाषा पहले से बोलते हैं। Koboshi में आप नई भाषा सीखते हुए अपने परिवार की भाषा का अभ्यास भी कर सकते हैं। यह इतना आसान होना चाहिए कि आपका ध्यान उस भाषा पर रहे जिसे आप मुख्य रूप से सीख रहे हैं।
अगर आप मुख्य रूप से हिंदी, उर्दू या बांग्ला सीख रहे हैं, तो जवाब उसी भाषा की लिपि में देने की कोशिश कीजिए। जिनकी यह अपनी भाषा है, उनके लिए यह अपडेट बस जवाब देने का एक आसान तरीका है, जिसमें थोड़ा आलस भी चल जाता है।
कौन-सी स्पेलिंग मानी जाती है?
हर लाइन में एक ही शब्द की अलग-अलग स्पेलिंग हैं। इनमें से कोई भी टाइप कीजिए, सही मानी जाएगी:
- mohabbat या muhabbat (محبت, मोहब्बत, प्यार)
- zaroor, zarur या zaror (ضرور, ज़रूर, बिल्कुल)
- theek, thik या thek (ٹھیک, ठीक, सही)
- bhalo, bhaalo या valo (ভালো, अच्छा)
- khub या khoob (খুব, बहुत)
रोमन अक्षरों में हर कोई अपने ढंग से लिखता है, इसलिए क्विज़ स्पेलिंग के मामले में ज़्यादा छूट देता है।
Koboshi हिंदी, उर्दू और बांग्ला बोलने वालों के लिए एक बढ़िया ऐप क्यों है?
अगर आपकी जड़ें उपमहाद्वीप (भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में हैं, तो बहुत मुमकिन है कि आप दो या उससे ज़्यादा भाषाएँ बोलते हों। अंग्रेज़ी ज़्यादातर पढ़े-लिखे और शहरी परिवारों में बोली जाती है। भारत के 2005 के राष्ट्रीय घरेलू सर्वे में करीब हर पाँच में से एक वयस्क कम से कम थोड़ी अंग्रेज़ी बोल सकता था। लेकिन कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने वालों में से 88.5% बोल सकते थे, जबकि जो वयस्क कभी स्कूल नहीं गए, उनमें से लगभग कोई नहीं। शहरों में रहने वालों में यह 34.8% था और गाँवों के लोगों में 14.1% (Azam, Chin and Prakash, using the India Human Development Survey 2005)। पाकिस्तान में अंग्रेज़ी बोलने वालों की कोई राष्ट्रीय गिनती नहीं है, लेकिन दो आँकड़े देखे जा सकते हैं: शहरी पंजाब में 6 से 16 साल के 47% बच्चे प्राइवेट स्कूल जाते हैं (ASER Pakistan 2023, Punjab), और यूनेस्को की गिनती में 2023 में 114,849 पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी छात्र विदेश में पढ़ रहे थे, जबकि 2005 में यह संख्या 24,601 थी (UNESCO Institute for Statistics)। बांग्लादेश में इंग्लिश मीडियम स्कूल कम हैं और उनमें पढ़ाई महँगी है: 21,000 से ज़्यादा रजिस्टर्ड सेकेंडरी स्कूलों में से 148 इंग्लिश मीडियम हैं (BANBEIS, reported by The Business Standard, 2026)। इन इलाक़ों में सामाजिक असमानता भी बहुत है। ऐसे में, सीखने के लिए ख़ुद पहल करने वाले ज़्यादातर लोग शायद कई भाषाएँ जानते हों।
तो अगर आप कोई नई भाषा सीख रहे हैं, तब भी आप साथ में अपनी भाषा देखना चाहेंगे, ताकि उसे अपनी भाषा से जोड़कर समझना और सीखना आसान हो।

और क्या आप जानते हैं कि बचपन से स्कूल में अंग्रेज़ी का इस्तेमाल करने वाले उर्दू, हिंदी और बांग्ला भाषी लोग अपनी मातृभाषा में शायद उन लोगों से कमज़ोर होते हैं जो सच में सिर्फ़ एक ही भाषा बोलते हैं? इसकी वजह वह सामाजिक माहौल है जिसमें अंग्रेज़ी का इस्तेमाल आसानी से स्वीकार किया जाता है और लोग रोज़ की बातचीत में अंग्रेज़ी शब्दों का सहारा लेते हैं। रिसर्च भी इसी तरफ़ इशारा करती है। दो भाषाओं के साथ बड़े होने वाले बच्चे हर एक भाषा में, सिर्फ़ एक भाषा बोलने वाले बच्चों से कम शब्द जानते हैं। कई स्टडी में शामिल 3 से 10 साल के 1,738 बच्चों के आँकड़ों को एक साथ देखा गया। घर पर कोई दूसरी भाषा (इनमें हिंदी, पंजाबी और उर्दू भी थीं) और स्कूल में अंग्रेज़ी बोलने वाले बच्चों का अंग्रेज़ी शब्दावली के एक टेस्ट में स्कोर 96.3 था, जबकि सिर्फ़ एक भाषा बोलने वाले बच्चों का 106.8 (Bialystok et al., 2010)। मॉन्ट्रियल के 743 छोटे बच्चों पर 2024 की एक स्टडी में भी हर एक भाषा में यही नतीजा मिला, लेकिन दोनों भाषाओं के शब्द जोड़ने पर वे सिर्फ़ एक भाषा बोलने वाले बच्चों से ज़्यादा शब्द जानते थे (Byers-Heinlein et al., 2024)। भाषाविदों के मुताबिक, जो भाषा ज़्यादातर घर पर बोली जाती है, उसमें शब्दों की जानकारी समाज में ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा के मुक़ाबले कम रह जाती है (Montrul, 2012)।
ऑनलाइन बातचीत में अंग्रेज़ी कितनी बार मिलाई जाती है, इसे गिना भी जा सकता है। 2014 वाली उसी हिंदी फ़ेसबुक स्टडी में, मुख्य रूप से हिंदी में लिखे करीब हर चार में से एक कमेंट (398 में से 93, 23.37%) में हिंदी वाक्यों के बीच अंग्रेज़ी शब्द आ गए थे (Vyas et al., EMNLP 2014)। हिंदी अख़बार दैनिक जागरण के 51,277,891 शब्दों में “party” (पार्टी) “over 67K” बार आया, जबकि “the counts for the equivalent Hindi forms are relatively low” (इसी अर्थ वाले हिंदी शब्दों का इस्तेमाल इसके मुक़ाबले कम हुआ) (Bali et al., 2014)। बांग्ला की बात करें तो जादवपुर यूनिवर्सिटी के कैंपस फ़ेसबुक ग्रुप्स में करीब हर पाँच में से एक पोस्ट (2,309 में से 21.05%) में बांग्ला और अंग्रेज़ी मिली हुई थी (Das and Gambäck, ICON 2014)। और 2025 का रोमन उर्दू वाला पेपर “frequent code-switching with English” (बातचीत में बार-बार अंग्रेज़ी के शब्द या वाक्य इस्तेमाल करना) को रोमन उर्दू की एक मुश्किल बताता है (Butt, Varanasi and Neumann, RANLP 2025)।